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इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी ने पाकिस्तान के परमाणु सुरक्षा का लिया जायजा, 12 दिन सर्वे के बाद कही ये बात

 Written By: Mangal Yadav
 Published : Oct 10, 2026 12:29 pm IST,  Updated : Oct 10, 2026 12:36 pm IST

इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी ने पाकिस्तान में परमाणु सुरक्षा का जायजा लिया। इसके बाद एजेंसी ने कहा कि पाकिस्तान में परमाणु सुरक्षा का मज़बूत सिस्टम है।

पाकिस्तान का ग्वादर पावर प्लांट- India TV Hindi
पाकिस्तान का ग्वादर पावर प्लांट Image Source : ANI

इस्लामाबाद: इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) ने पाकिस्तान में अपना पहला 'फिजिकल प्रोटेक्शन एडवाइज़री मिशन' पूरा करने के बाद कहा है कि पाकिस्तान ने परमाणु सामग्री और सुविधाओं की सुरक्षा के लिए एक "मज़बूत परमाणु सुरक्षा सिस्टम" बनाया है। IAEA की सात सदस्यीय टीम ने शुक्रवार को 12 दिन का 'इंटरनेशनल फिजिकल प्रोटेक्शन एडवाइज़री सर्विस' (IPPAS) मिशन पूरा किया। यह मिशन पाकिस्तानी सरकार के अनुरोध पर 28 सितंबर से 9 अक्टूबर तक चलाया गया था।

परमाणु सुरक्षा की समीक्षा

पाकिस्तान न्यूक्लियर रेगुलेटरी अथॉरिटी (PNRA) की मेज़बानी में हुए इस मिशन ने परमाणु सुरक्षा के लिए देश के कानूनी और रेगुलेटरी ढांचे की समीक्षा की और एक परमाणु सुविधा केंद्र पर भौतिक सुरक्षा उपायों का आकलन किया। IAEA ने एक बयान में कहा  कि IPPAS टीम ने पाया कि पाकिस्तान ने परमाणु सामग्री और परमाणु सुविधाओं की भौतिक सुरक्षा के लिए एक मज़बूत परमाणु सुरक्षा सिस्टम बनाया है, जिसे देखी गई सुविधा में सही ढंग से लागू होते हुए पाया गया। 

एजेंसी ने कहा कि समय-समय पर समीक्षा के ज़रिए इस सिस्टम में लगातार सुधार किया जाता है, जबकि पाकिस्तान का क्षमता-निर्माण इंफ्रास्ट्रक्चर राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर परमाणु सुरक्षा विशेषज्ञता में योगदान देता है। टीम ने PNRA, पाकिस्तान एटॉमिक एनर्जी कमीशन और अन्य संबंधित लोगों के अधिकारियों से मुलाकात की और कराची न्यूक्लियर पावर जेनरेटिंग स्टेशन पर KANUPP डीकमीशनिंग प्रोजेक्ट का दौरा किया।

टीम ने दिए कई सुझाव

बता दें कि पाकिस्तान का पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र, कैनेडियन ड्यूटेरियम यूरेनियम (CANDU) रिएक्टर, 1971 में शुरू हुआ था और 2021 में इसे स्थायी रूप से बंद कर दिया गया था। विशेषज्ञों ने साइट पर चल रही डीकमीशनिंग गतिविधियों और इस्तेमाल हो चुके ईंधन (spent-fuel) के भंडारण का निरीक्षण किया। इस मिशन का नेतृत्व मोरक्कन एजेंसी फॉर न्यूक्लियर एंड रेडियोलॉजिकल सेफ्टी एंड सिक्योरिटी के पूर्व महानिदेशक खम्मर मराबित ने किया। टीम में चीन, रोमानिया, रूस और स्लोवाकिया के विशेषज्ञों के अलावा IAEA के दो कर्मचारी भी शामिल थे।

IAEA ने कहा कि टीम ने पाकिस्तान के परमाणु सुरक्षा सिस्टम और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं को और मज़बूत करने के लिए सिफारिशें और सुझाव दिए, साथ ही रेगुलेटरी और सुविधा स्तरों पर कई अच्छे तौर-तरीकों की पहचान भी की। IAEA की उप महानिदेशक कैरीन हर्वियो ने कहा कि पाकिस्तान में पहला IPPAS मिशन सफलतापूर्वक पूरा हो गया है, जो अपने अच्छी तरह से स्थापित परमाणु सुरक्षा सिस्टम के रेगुलेटरी और ऑपरेशनल पहलुओं को और बेहतर बनाने के लिए देश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।  

PNRA के चेयरमैन ने कही ये बात

PNRA के चेयरमैन ज़िया हुसैन शाह ने कहा कि इस मिशन की मेज़बानी करना एक मज़बूत न्यूक्लियर सिक्योरिटी सिस्टम बनाए रखने के प्रति पाकिस्तान की प्रतिबद्धता को दिखाता है। साथ ही, एक्सपर्ट्स की रिपोर्ट से इसके कानूनी और रेगुलेटरी ढांचे और फैसिलिटी-लेवल पर काम करने के तरीकों को और मज़बूत करने के लिए एक आधार मिला है। 1995 में शुरू हुए इस प्रोग्राम के तहत IAEA द्वारा किया गया यह 112वां IPPAS मिशन था। IPPAS मिशन देशों को उनके नेशनल न्यूक्लियर सिक्योरिटी सिस्टम को मज़बूत करने में मदद करते हैं। वे न्यूक्लियर और अन्य रेडियोएक्टिव मटीरियल और उनसे जुड़ी सुविधाओं की सुरक्षा के लिए इंटरनेशनल नियमों और IAEA की गाइडलाइंस को लागू करने पर सलाह देते हैं। पाकिस्तान 'न्यूक्लियर मटीरियल की फिजिकल सुरक्षा पर कन्वेंशन' का हिस्सा है और उसने 2016 में इसके 2005 के संशोधन को मंज़ूरी दी थी।

इनपुट- पीटीआई

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